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कार्तिक माह की महत्ता | यहाँ सभी महीनो में सबसे पवित्र माह कहलाता है |

कार्तिक माह की महत्ता हिन्दू कैलेंडर का आठवां महीना कार्तिक माह से जाना जाता है | यहाँ सभी महीनो में सबसे पवित्र माह कहलाता है | पदम् पुराण के अनुसार कार्तिक माह भगवन श्री कृष्ण को सबसे प्रिय था | इसी माह में सबसे अधिक तीज - त्यौहार मनाये जाते है | भगवन शिव और माता पारवती जी के बेस पुत्र कार्तिकेय का जन्म अश्वनी माह की पूर्णिमा के दिन हुआ था | इसलिए इस माह को कार्तिक माह से जाना जाता है | कार्तिकेय का जन्म के पीछे प्राचीन शाश्त्रो में कथा का उल्लेख है | इस समय देवी पारवती शैय्या से उठकर कौतुहल वश एक सरोवर के टट पर गई जो सुवर्णमय कमलो से सुशोभित था | वहां जल विहार करने के पश्चात् बे सखियों के साथ सरोवर के टट पर बैठी और सरोवर के जल को पिने की इच्छा करने लगी | इतने में ही उन्हें सूर्य के सामान तेजस्विनी छः कृतिकाएँ दिखाई दी | वे कमल के पत्ते में रखे जल को देखने की इच्छा व्यक्त की | तब उन कृतिकाओं ने निवेदन किया की हम आपको जल देंगी पैर आपके गर्भ से जो पुत्र उत्पन हो वो हमारा भी पुत्र माना जाए एवं हममें भी मातृभाव रखने वाला तथा हमारा रक्षक हो | वह पुत्र तीनो लोकों में विख्यात होगा | उनकी बातें सुनकर पारवती माता ने कहा ऐसा ही होगा | यह उत्तर पाकर कृतिकाओं को हर्ष हुआ उन्होंने कमल पत्र में स्तिथ थोड़ा सा जल पारवती जी को भी दे दिया | उनके साथ पारवती जी ने भी उस जल का पान किआ | जल पान के तुरंत बाद ही रोग, शोक  का नाश करने वाला एक सूंदर और अद्भुत बालक भगवती पारवती की दाहिनी कोख फाड़कर निकल आया | उसका शरीर सूर्य की किरणों के सामान प्रकाश पुंज से व्यापत था | उसने अपने हाथ में तीक्ष्ण शक्ति , शूल और अंकुश धारण कर रखे थे | वह अग्नि के सामान तेजस्वी और सुवर्ण के सामान गोर रंग का बालक दैत्यों को मारने के लिए प्रकट हुआ था , इसलिए उसका नाम कुमार हुआ | तीनो लोकों में विशाल , षष्ठमुख , स्कन्द, षडानन और कार्तिकेय आदि नामो से विख्यात हुए | इसलिए शास्त्रो के अनुसार कार्तिक माह में प्रातः काल ब्रह्म महूरत में स्नान का , जप , तप. दान-पुण्य , पूजा पाठ और व्रत आदि का बड़ा महत्त्व बताया गया है | इस माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को  नर्मदा नदी के टट पर स्थित शुक्ल तीर्थ में स्नान करके उपवास करके शिवजी को स्नान कराकर उनके आगे घी का दीपक जल कर विधि विधान से पूजा करते है , वे अपनी २१ पीढ़ियों के साथ शिवलोक में रहते है | शास्त्रो के अनुसार कार्तिक माह में ब्रह्मा मुहर्त में स्नान करके व्रत रखने पर उसे मोक्ष की प्राप्ति व् सभी पापो से मुक्ति प्राप्त होती है | प्रातः काल स्नान करने से सूर्य व् चन्द्रमा की मुनष्य के शरीर व् मन पर सकारात्मक प्रभाव डालती है | कार्तिक स्नान का शास्त्रों में बहुत महत्त्व बताया गया है | जो व्यक्ति पुरे माह स्नान नही कर सकता वह अंतिम पांच दिनों में स्नान करके उपवास रख सकता है , जिन्हें शास्त्रो में भीष्म पंचक या विष्णु पंचक कहते है | इस माह सबसे अधिक त्यौहार पड़ते है | इस माह में शरद पूर्णिमा , करवा चौथ , धन तेरस , रूप चतुर्दशी , हनुमान जयंती , दीपावली , गोवर्धन पूजा, अन्नकूट , भाई दूज, आंवला नवमी , देव उतनी ,एकादशी , तुलसी विवाह , बैकुंठ चतुर्दशी ,  और कार्तिक माह की पूर्णिमा पड़ती है | पदम् पुराण के अनुसार यह महीना धर्म , अर्थ , काम, मोक्ष प्रदान करने वाला है | इस माह कुवारी कन्या कार्तिक में पुरे माह स्नान करती है तो उन्हें मन चाहा वर , सौभाग्य , सुख समृद्धि प्राप्त होती है | वैवाहिक औरत के लिए अखंड सौभाग्यवती का वरदान भगवन शिव से प्राप्त होता है | यदि कोई किसी कारन वश इस माह स्नान न कर पाए तो अपने आस पास या रिश्तेदारो के जो भी कन्या या स्त्री स्नान करे उसे फल प्राप्त होता है | पुरे माह स्नान करके इनका अनुष्ठान ज़रूर करना चाहिए , तभी पूर्ण फल प्राप्त होता है | वैसे कार्तिक माह में सभी तीर्थ स्थानों पर स्नान करना श्रेष्ठ मन जाता है , लेकिन शाश्त्रो के अनुसार पुष्कर को समस्त तीर्थो का आदि माना जाता है | जैसे भगवन विष्णु सभी देवो के आदि देव है | जो व्यक्ति पुरे माह स्नान न कर सके वे कार्तिक माह की पूर्णिमा को पुष्कर में स्नान करे तो सम्पूर्ण यग्यो का फल प्राप्त करता है और अंत में ब्रह्मा लोक जाता है | जैसे नदियो में गंगा सर्वश्रेष्ठ है , भगवन में विष्णु उसी प्रकार माहो में कार्तिक माह सर्वश्रेष्ठ है | इस वर्ष कार्तिक माह १५ अक्टूबर २०१६ से १४ नवम्बर २०१६ नवम्बर तक मनाया जाएगा | हिन्दू कैलेंडर का आठवां महीना कार्तिक माह से जाना जाता है | यहाँ सभी महीनो में सबसे पवित्र माह कहलाता है | पदम् पुराण के अनुसार कार्तिक माह भगवन श्री कृष्ण को सबसे प्रिय था | इसी माह में सबसे अधिक तीज - त्यौहार मनाये जाते है | भगवन शिव और माता पारवती जी के बेस पुत्र कार्तिकेय का जन्म अश्वनी माह की पूर्णिमा के दिन हुआ था | इसलिए इस माह को कार्तिक माह से जाना जाता है | कार्तिकेय का जन्म के पीछे प्राचीन शाश्त्रो में कथा का उल्लेख है | इस समय देवी पारवती शैय्या से उठकर कौतुहल वश एक सरोवर के टट पर गई जो सुवर्णमय कमलो से सुशोभित था | वहां जल विहार करने के पश्चात् बे सखियों के साथ सरोवर के टट पर बैठी और सरोवर के जल को पिने की इच्छा करने लगी | इतने में ही उन्हें सूर्य के सामान तेजस्विनी छः कृतिकाएँ दिखाई दी | वे कमल के पत्ते में रखे जल को देखने की इच्छा व्यक्त की | तब उन कृतिकाओं ने निवेदन किया की हम आपको जल देंगी पैर आपके गर्भ से जो पुत्र उत्पन हो वो हमारा भी पुत्र माना जाए एवं हममें भी मातृभाव रखने वाला तथा हमारा रक्षक हो | वह पुत्र तीनो लोकों में विख्यात होगा | उनकी बातें सुनकर पारवती माता ने कहा ऐसा ही होगा | यह उत्तर पाकर कृतिकाओं को हर्ष हुआ उन्होंने कमल पत्र में स्तिथ थोड़ा सा जल पारवती जी को भी दे दिया | उनके साथ पारवती जी ने भी उस जल का पान किआ | जल पान के तुरंत बाद ही रोग, शोक  का नाश करने वाला एक सूंदर और अद्भुत बालक भगवती पारवती की दाहिनी कोख फाड़कर निकल आया | उसका शरीर सूर्य की किरणों के सामान प्रकाश पुंज से व्यापत था | उसने अपने हाथ में तीक्ष्ण शक्ति , शूल और अंकुश धारण कर रखे थे | वह अग्नि के सामान तेजस्वी और सुवर्ण के सामान गोर रंग का बालक दैत्यों को मारने के लिए प्रकट हुआ था , इसलिए उसका नाम कुमार हुआ | तीनो लोकों में विशाल , षष्ठमुख , स्कन्द, षडानन और कार्तिकेय आदि नामो से विख्यात हुए | इसलिए शास्त्रो के अनुसार कार्तिक माह में प्रातः काल ब्रह्म महूरत में स्नान का , जप , तप. दान-पुण्य , पूजा पाठ और व्रत आदि का बड़ा महत्त्व बताया गया है | इस माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को  नर्मदा नदी के टट पर स्थित शुक्ल तीर्थ में स्नान करके उपवास करके शिवजी को स्नान कराकर उनके आगे घी का दीपक जल कर विधि विधान से पूजा करते है , वे अपनी २१ पीढ़ियों के साथ शिवलोक में रहते है | शास्त्रो के अनुसार कार्तिक माह में ब्रह्मा मुहर्त में स्नान करके व्रत रखने पर उसे मोक्ष की प्राप्ति व् सभी पापो से मुक्ति प्राप्त होती है | प्रातः काल स्नान करने से सूर्य व् चन्द्रमा की मुनष्य के शरीर व् मन पर सकारात्मक प्रभाव डालती है | कार्तिक स्नान का शास्त्रों में बहुत महत्त्व बताया गया है | जो व्यक्ति पुरे माह स्नान नही कर सकता वह अंतिम पांच दिनों में स्नान करके उपवास रख सकता है , जिन्हें शास्त्रो में भीष्म पंचक या विष्णु पंचक कहते है | इस माह सबसे अधिक त्यौहार पड़ते है | इस माह में शरद पूर्णिमा , करवा चौथ , धन तेरस , रूप चतुर्दशी , हनुमान जयंती , दीपावली , गोवर्धन पूजा, अन्नकूट , भाई दूज, आंवला नवमी , देव उतनी ,एकादशी , तुलसी विवाह , बैकुंठ चतुर्दशी ,  और कार्तिक माह की पूर्णिमा पड़ती है | पदम् पुराण के अनुसार यह महीना धर्म , अर्थ , काम, मोक्ष प्रदान करने वाला है | इस माह कुवारी कन्या कार्तिक में पुरे माह स्नान करती है तो उन्हें मन चाहा वर , सौभाग्य , सुख समृद्धि प्राप्त होती है | वैवाहिक औरत के लिए अखंड सौभाग्यवती का वरदान भगवन शिव से प्राप्त होता है | यदि कोई किसी कारन वश इस माह स्नान न कर पाए तो अपने आस पास या रिश्तेदारो के जो भी कन्या या स्त्री स्नान करे उसे फल प्राप्त होता है | पुरे माह स्नान करके इनका अनुष्ठान ज़रूर करना चाहिए , तभी पूर्ण फल प्राप्त होता है | वैसे कार्तिक माह में सभी तीर्थ स्थानों पर स्नान करना श्रेष्ठ मन जाता है , लेकिन शाश्त्रो के अनुसार पुष्कर को समस्त तीर्थो का आदि माना जाता है | जैसे भगवन विष्णु सभी देवो के आदि देव है | जो व्यक्ति पुरे माह स्नान न कर सके वे कार्तिक माह की पूर्णिमा को पुष्कर में स्नान करे तो सम्पूर्ण यग्यो का फल प्राप्त करता है और अंत में ब्रह्मा लोक जाता है | जैसे नदियो में गंगा सर्वश्रेष्ठ है , भगवन में विष्णु उसी प्रकार माहो में कार्तिक माह सर्वश्रेष्ठ है | इस वर्ष कार्तिक माह १५ अक्टूबर २०१६ से १४ नवम्बर २०१६ नवम्बर तक मनाया जाएगा |